THIS DOCUMENTARY EDITED BY PRANAV PATEL
दूसरा चरण पिछले चरण मैं मैंने आपको अपने परिवार से मिलवाया था आज में आप को जहाँ मेरा बचपन बिता वहां ले चलता हूँ , अब में तीन साल का हो गया हूँ, मेरा बचपन जबलपुर के गढ़ाफाटक इलाका में बिता, यहाँ के तिराहे पे एक और मेरा घर और दूसरी तरफ हमारी दुकान है, इसी इलाका में मै खेला कूदा, यहाँ की गलियों में मेरा बचपन बिता मेरे बचपन के दोस्त यार सब इसी स्थान में रहते हैं। मै इस कहानी में अभी तीन साल का हूँ मुझे ज्यादा समझ नहीं है लेकिन कुछ धुंधली सी यादें बचपन की हर किसी को याद होती हैं, वैसी ही एक याद मेरे साथ भी है, हमारे दादा जी घर के सबसे निचे सड़क से लगे हुए कमरे मैं बैठा करते थे मै जब भी खेलते हुए वहां से निकलता वो अपनी छड़ी मै मेरी कमीज को फसा लेते और मुझे अपनी तरफ खिंच के मेरे साथ खेलते, हमारे दादा जी से घर के सरे लोग डरते थे क्योंकि वो घर के सबसे बड़े थे लेकिन वो सबसे बोहोत प्यार करते थे, और शायद जिसे मैं डर कह रहा हूँ वो उनके लिए सबका आदर भाव था, मेरी दादा जी के साथ बोहोत काम यादे है क्योंकि मेरे बचपन में ही दादा जी हमें छ...
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